Ram जी की कहानी: 14 साल के वनवास में सबसे ज्यादा किस शहर में रुके थे भगवान Ram, सीता और लक्ष्मण?

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Ram कहानी: 14 साल के वनवास में सबसे ज्यादा किस शहर में रुके थे भगवान Ram, सीता और लक्ष्मण?

अयोध्या में बन रहे भगवान Ram मंदिर में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है. अयोध्या में होने वाले इस प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की तैयारियों के बीच भगवान राम की कहानियां भी बताई जा रही है.

भगवान Ram के वनवास की कहानियां

अपने वनवास में भगवान Ram ने अयोध्या से धुनषकोटि और फिर लंका तक की यात्रा की थी. इन 14 साल के वक्त में वे अलग अलग जगहों पर रुके थे और एक जगह पर कुछ वक्त रहकर आगे बढ़े थे. भगवान Ram , लक्ष्मण, सीता, जिन-जिन राज्यों में रुके थे, उसमें उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तमिलनाडु आदि शामिल है.

चित्रकूट: भगवान Ram का प्रिय स्थान

भगवान Ram का वनवास 14 साल का था और माना जाता है कि इस वनवास के दौरान सबसे ज्यादा वक्त उन्होंने चित्रकूट में ही बिताया था. अयोध्या से चित्रकूट तक आने में भगवान को 10 दिन लगे थे. इसके बाद लंबे समय तक वे चित्रकूट और उसके आसपास के स्थान पर रहे थे.

चित्रकूट में भगवान Ram ने आश्रम जीवन बिताते हुए अनेक ऋषि-मुनियों से मिले और उनके सानिध्य में विचार-विमर्श किया। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य ने उनके वनवास को और भी रमणीय बना दिया था। चित्रकूट की पहाड़ियों में भगवान राम के चरण-चिह्न, जिन्हें हम आज भी देख सकते हैं, ने इस स्थान को धार्मिक महत्वपूर्ण बना दिया है।

वनवासी Ram की यात्रा

भगवान Ram के तीर्थों पर शोध कर रहे डॉ Ram अवतार की किताब वनवासी Ram और लोक संस्कृति के अनुसार, वनवास के 10 साल के बारे में काफी कम जानकारी मौजूद है. 14 साल के वनवास में 10 साल का वर्णन कुछ चौपाइयों में ही पूरा हो गया है और वाल्मीकि रामायण में 10 साल के लिए सिर्फ 3-4 श्लोक लिखे गए हैं.

वनवास के दौरान भगवान Ram ने ज़िंदगी के विभिन्न पहलुओं को छूने का अद्वितीय अवसर प्राप्त किया। उनकी यात्रा ने भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से भी एक महत्वपूर्ण पूर्वरूप दिखाया।

चित्रकूट का महत्व

अगर आप चित्रकूट जाते हैं तो वहां कई मंदिर, आश्रम को लेकर कहा जाता है कि वहां भगवान Ram आए थे. हालांकि, चित्रकूट में बिताए गए वक्त को लेकर कई कहानियां हैं और अलग अलग टाइम की डिटेल सामने आती है.

वनवासी Ram की श्रेणीय यात्रा

डॉ Ram अवतार की किताब के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान राम ने चित्रकूट के अलावा भी कई और स्थानों पर अपने पाद चिह्न छोड़े। इन स्थानों में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तमिलनाडु आदि शामिल हैं। इस पूरी यात्रा के दौरान उनकी भक्ति और आध्यात्मिक शिक्षाएं लोगों के लिए अनमोल रही हैं।

समापन

इस रीति भरी यात्रा के दौरान, भगवान Ram ने ज़िन्दगी के हर पहलुओं को महसूस किया और उनकी यात्रा ने उन्हें दुनियाभर में एक महान धार्मिक और सांस्कृतिक आदर्श बना दिया। चित्रकूट जैसे स्थानों का महत्व आज भी हमारे समाज में बना हुआ है और लोग इन्हें भगवान Ram की धरोहर के रूप में पूजते हैं।

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