Shailendra Jha July 9, 2018

गोत्र होता क्या है ये सवाल शायद हम में से कई के मन में होगा, ये सवाल तब जरुर आता है जब पंडित जी हमसे किसी उपलक्ष पर हमारा गोत्र  पूछते हैं । हिन्दू घर्म में गोत्र का बहुत महत्व है, महत्व इतना है कि  विवाह से पहले भी लड़का और लड़की का गोत्र पता किया जाता है ।

गोत्र , गो यानि हमारी इन्द्रियां और त्र यानि रक्षा करना जो किसी ऋषि की तरफ संकेत देता है। गोत्र का सबसे ज्यादा महत्व ब्राह्मण समाज को है क्योकि वो ऋषियों की वंशज माने जाते है। इसका अर्थ है हर ब्राह्मण का किसी न किस ऋषि कुल से सम्बन्ध होता है ।

गोत्र के प्रकारों की संख्या बहुत है पर मुख्य रूप से चार प्रखुब गोत्र माने जाते हैं –

  • वशिष्ठ
  • अंगिरा,
  • भगु
  • कश्यप

उपरोक्त प्राचीन समय में प्रमुख थे बाद में इस क्रम में कुछ और भी गोत्र जुड़ गये जैसे

  • अत्रि
  • जमदग्नि,
  • अगस्त्य
  • विश्वामित्र

अगर आसान शब्दों में कहे तो गोत्र का अर्थ है हमारी पहचान ।पहले तो ये गोत्र ऋषियों के आधार पर होता था पर जब से कलयुग की शुरुवात हुई है तब से ये इंसान की पहचान उसके कर्म, स्थान और जाति से भी सम्बंधित हो गयी है ।आपको जानकार हैरानी होगी कि पहले गोत्र की वजह से लोग आपस में प्रेम से जुड़े रहते थे पर वर्तमान में ये सब एक औपचारिकता रह गयी है ।

एक और रोचक बात गोत्र से जुडी है । जिन ब्राह्मणों को अपना गोत्र नही पता वो पूछने पर सिर्फ कश्यप गोत्र का नाम लेते हैं। इसकी पीछे वजह ये है कि कश्यप ऋषि ने कई शादियाँ की थी और उनके पुत्रो की संख्या भी ज्यादा थी इसलिए जिनको अपना गोत्र नही पता वो कश्यप ऋषि के वंशज माने जाते हैं ।

आपने बहुत सुना होगा कि जब भी लड़का लड़की जो एक ही गोत्र के होते हैं उन्हें विवाह करने की अनुमति नही दी जाती।  जैसे अगर दो लोग एक ही गोत्र के हैं तो वो एक ही परिवार के सदस्त माने जाते हैं और एक ही परिवार के सदस्य को हिन्दू धर्म के अनुसार एक ही कुल का माना जाता है। यानि इस हिसाब से लड़का लड़की भाई और बहन होते है और भाई बहन शादी नही कर सकते । एक ही कुल में शादी नही की जा सकती और अगर कोई कर लेता तो कहा जाता है की उनकी मनस्थिति ख़राब होती है और उनके औलादे ब्राह्मण कुल के नही बल्कि चांडाल कुल के माने जाते है । ये भी कह जाता है की शादी के वक्त सिर्फ लड़के या लड़की का गोत्र ही नही माता, दादी और नानी का गोत्र भी देखा जाता है।

इस बात को विज्ञान ने भी माना है। उनके अनुसार अगर एक ही गोत्र या कुल में शादी होती है तो कई अनुवाषिक बीमारियाँ आने वाले बच्चो को होने की पूरी सम्भावना होती है। अगर गोत्र अलग होगा तो उससे होने बच्चे बहुत गुणी होंगे ।

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