admin October 21, 2017

दोस्तों आज भैयादूज त्यौहार मनाया जा रहा हे…यह त्यौहार भाई और बहन के प्यार का त्यौहार हे, पर क्या आपको पता हे भैयादूज धर्मराज यमराज और उनकी बहन यमुना के वजह से मनाया जाता हे…तो आईये जानते हे इसके पीछे की कहानी…..

मार्कंडेय पूरण के अनुसार विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा का विवाह भगवान सूर्य से हुआ था, जब देवी संज्ञा ने पहली बार भगवान सूर्य को देखा तो उनके तेज को सहन नहीं कर पाई, यह देख सूर्य देव क्रोधित हो गए और देवी संज्ञा को श्राप दे बेठे की उनका पुत्र लोगो के  संयमन करनेवाला (उनके प्राण लेनेवाला) होगा, परन्तु जब देवी संज्ञा ने सूर्य देव को चंचल दृष्टि से देखा तो उन्होंने कहा की तुम्हे जो कन्या होगी वह इसी प्रकार चंचल होगी | इस श्राप और आशिर्वाद के फलस्वरूप उन्हें पुत्रयौम हुए और पुत्री युमी हुई जो बाद में यमुना के नाम से प्रशिद्ध हुई |

 

यमराज और यमुना आपस में बहुत प्यार करते थे , जब युम्पुरी बनाने का काम ख़तम हुआ तब यमुना गौलोक (कृष्ण भगवान द्वारा बसाया गया लोक मथुरा ) आ गयी, आते हुए ओ यमराज से बोली भैया मिलने के लिए आते रहना..

 

यमराज यमपुरी के कामो में वयस्त रहने लगे, बहुत दिन बीत तब उन्हें यमुना की याद आयी और उन्होंने दूतो को भेजकर यमुना का हाल जानना चाह, परंतू दूतो को यमुना नहीं मिली, तब यमराज खुद गौलोक आये, तब यमुना वही विश्राम करती हुई मिली

 

 

यमुना ने भाई यमराज की खूब सेवा की और छप्पनभोग खिलाये, यमराज यमुना की इस सेवा से बहूत खुश हुए और यमुना को वरदान मांगने को कहा | यमुना ने यमराज से वर माँगा की आप हर वर्ष इस दिन मेरे यहाँ भोजन करने आयेंगे और इस दिन जो भी बहन अपनी भाई को टिका करके भोजन कराएगी उसे यमपुरी न जाना परे |

 

यह मांगने पर यमराज तथास्तु कहकर वहा से चले गए, मान्यता हे इसी दिन से भैयादूज का त्यौहार मनाया जाता हे , इस दिन जो भी भाई मथुरा में यमुना में स्नान करके अपनी बहन के घर भोजन करते हे उन्हें धर्मराज यमराज के यमपुरी नहीं बल्कि सीधा स्वर्ग जाने का अवसर प्राप्त होता हे |

 

 

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