Shailendra Jha February 12, 2018

दोस्तों क्या आप जानते हे एक ऐसी गुम्फा हे जहा आज भी भगवन शंकर , माँ पारवती और अपने दोनों पुत्र गणपति , कार्तिकेय के साथ रहते हे, इस गुम्फा में दो द्वार जिसमे से एक स्वर्ग को जाता हे और दूसरा अमरनाथ को, ऐसा मन जाता हे की इस गुम्फा का तालुक महाभारत काल से हे.. चलिए जानते हे इस रहस्मयी गुम्फा के बारे में….

 

Shivkori cave

इस गुम्फा का नाम हे शीवखोरी जो रान्सू नमक गाँव जिला रेसाई, जम्मू में हे, इस गाँव का नाम रान्सू इस लिए परा क्यूंकि यहाँ पे भगवन शिव और भश्मासुर नामक राक्षस में भीषण युद्ध हुआ था, और भगवन शंकर को अपनी जान बचने के लिए इस गुम्फा में छुपना परा था..

कहते हे राक्षस भास्माशुर ने शिव जी की काथोड तपस्या की जिससे भगवन शिव जी अत्यधिक प्रसन हुए और राक्षस को वरदान मांगने के लिए कहा, भाम्शाहुर न वरदान में माँगा की , में जिस किसी भी चीज पर हाथ रखु वह जल के भष्म हो जाये, भगवन शिव तो ठहरे भोले भाले उन्होंने भाम्ससुर को या वरदान दे दिया…

वरदान पाते ही भश्मासुर तबाही मचाने लगा, उस के रास्ते में जो भी आया ओ उसे भष्म करता चला गया, इसी बिच नारदमुनी भश्मासुर से मिले और माँ पारवती के सौंदर्य की तारीफ़ करने लगे, उन्होंने इतनी तारीफ़ कर दी की भश्मासुर पारवती से विवाह करने की सोचने लगा, और इसी इरादे से कैलाश गया और भगवन शंकर को युद्ध के लिए ललकारा..

उनके बिच रान्सू में भीषण युद्ध हुआ जब भश्मासुर को लगा की वह पराजित हो जायेगा उसने भगवन शिव को ही भष्म करने की सोची , और उनके उपर हाथ रखने का प्रयत्न करने लगा, भगवन शिव भी इस से बचने के लिए एक गुम्फा में छिप गए.

तभी नारायण स्वयं मोहिनी का रूप लेके भाम्शासुर के सामने प्रकट हुए, मोहिनी की सुन्दरता को देखकर भश्मासुर उन पे मोहित हो गया और मोहिनी और भस्मासुर नृत्य करने लगे, मोहिनी ने नृत्य में भस्मासुर को इतना सरूर हो गया  की वह कब खुद के सर पर हाथ रख बैठा और भस्म हो गया उसे पता ही नहीं चला…

इसी गुम्फा का नाम परा शीवखोरी , जब तक भश्मासुर अगनी में भस्म नहीं हुआ, तब तक भगवन शिव में पारवती तथा उनके दोनों पुत्र गणेश एवं कार्तिकेय के साथ इसी गुम्फा में रहे…

तब से लेके आज तक शिव जी और उनका परिवार इस गुम्फा में रहते हे , इस गुम्फा के द्वार बहुत ही संकरे हे , परन्तु अंदर जाते ही शिव जी के भव्य दरबार का आन्दन लेते ही बनता हे, वह प्रकृतिक रूप में निर्मित शिवलिंग हे , उनके बाजू में माँ पारवती गणेश और कार्तिकेय की प्रकृतिक रूप में निर्मित मुर्तिया हे…आप की ध्यान से देखने में शेषनाग , सुदर्शन चर्क के साथ ३३ करोड़ देवताओ के छोटे छोटे पिंड भी देख जायेंगे..

Shiv kodi caves shivlinga

 

शिवखोड़ी गुम्फा के बाजु में प्रकृतिक रूप से एक नदी बहती हे, जिसकी सुरुआत कहा से होती हे यह अब तक कोई नहीं जान पाया, शिवलिंग पर इसी नदी से लगातार अभिषेक होता रहता हे, ये भी कहते हे की कलयुग के पहले ये नहीं दूध की हुआ करती थी और शिवलिंग पर लगातार दुघ के अभिषेक होता था प्रकृतिक रूप से , पर अब ये नदी पानी की हो गयी हे, मान्यता ये भी हे की शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर पानी की जगह दूध के अभिषेक होता हे, ये पानी और दूध का अभिषेक कहा से होता हे , ये जल धारा कहा से निर्मित होती हे ये भी अब तक कोई नहीं जान पाया…

इस गुम्फा में दो द्वार भी हे , एक हे स्वर्ग का द्वार, कहते हे महाभारत काल में पांडव इसी द्वार से स्वर्ग गए थे, और एक हे अमरनाथ गुम्फा का द्वार, आदि काल में ऋषि महात्मा इस द्वार के प्रयोग करते थे अमरनाथ जाने के लिए, परन्तु अब ये दोनों ही द्वार बंद हे , कहा जाता हे जो भी मनुष्य इस द्वार में जाते हे ओ वापस नहीं आते | ये भी सुन ने में आया हे की कुछ सालो पहले दो से तिन लोगो ने इस द्वार में जाने का प्रयत्न किया था परन्तु वे कभी लोटे नहीं, नहीं अमरनाथ पहुचे…

Leave a comment.

Your email address will not be published. Required fields are marked*